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वित्त मंत्री जी का राष्ट्र के नाम संदेश.....
May 14, 2020 • अल्का यादव अग्रवाल

वीत्तीय मामलों के विषय में तो अधिक जानकारी नहीं है मुझे, पर चकित हूँ कि देश का दर्द समझने वाले, हिंदू राष्ट्र का समर्थन करने वाले , हिंदी में बात तक नहीं कर पाते 


   राज्य मंत्री जी बैठे हैं मैडम की बात का अनुवाद करने


 माना कि उनकी मातृ भाषा हिंदी नहीं रही होगी, पर इतने वर्षों में क्या ये भी न सीख पाईं??? इस मामले में सोनिया गाँधी को पूरे नम्बर मिलने चाहिये, कि विदेशी होकर भी, टूटी फूटी ही सही, पर हिंदी सीखी तो उन्होंने !!! विदेशी होने के बावजूद, सहजता से भारतीयता अपनाई , और अपने बच्चों को भी हिंदी सीखने को प्रोत्साहित किया ही होगा, वर्ना मुश्किल है कि पिता के न रहने पर विदेशी माँ के बच्चे अपनी जन्म भूमि से जुड़े रहें ...... 

खैर , यहाँ मुद्दा ये  है ही नहीं !
 एक तरफ मंत्रीजी बखान किये जा रही हैं टीवी पर, सरकार की महानता, उदारता का, दूसरी तरफ लाखों मज़दूर आज भी सड़कों पर भूखे प्यासे , पैदल , विषम परिस्थितियों में घर लौटने को विवश हैं, क्योंकि जिन पूंजिपतियों की तिजोरियाँ उनके दम पे भरती हैं, वो उनको चंद रोज रोटी ना दे पाये । मजदूरों की हितैषी सरकार हज़ारों रुपये के पैकेज गिना रही है टी. वी पर। जो सामने से इनको भोजन पानी और घर लौटने की मूलभूत सुविधा नहीं मुहैया कर पा रहे, वो किनको और कैसे ये हज़ारों करोड़ देगे??? 

  ग़ौरतलब है , कि मामला जमातियों का रहा हो, शराबियों का, या फिर अब इन बेबस मज़दूरों का..... अधिकतर चैनेल घूम फिर कर ये ही दिखाते मिलेंगे, कि दिल्ली, कोलकत्ता, महाराष्ट्र व पंजाब में ही है सारी समस्या...... क्यों????? क्योंकि इन प्रमुख राज्यों की हार की किरकिरी अब भी चुभ रही है इनकी आँखों में....... ऐसी विषम परिस्थिति में भी रीजनीति शर्मनाक है।
  माना ये सब सरकारें नाकारा हैं, परंतु अधिकतर लेबर बिहार, उत्तर प्रदेश लौट रहा है, वहाँ की सरकारें क्या कर रही हैं ???
      रातोंरात बिना विचारे लाकडाउन कर दिया, गरीबों के मसीहा ने बिना उनके बारे में सोचे??? 
45 दिन की मेहनत यूँ ही बेकार करने से तो बेहतर था 3-4 दिन सबको घर लौटाकर तब करते तो आज और आने वाले समय में दुर्दशा ना होती 
   मीडिया की स्तर तो इतना गिर गया है कि अब मज़दूरों पर हो रही थू थू से ध्यान हटाने के लिये ये उनको भी बुरा दिखाने लगेंगे, सरकार की नाकामी छुपाने के लिये । आगे शायद यही कहानियाँ आयेंगी कि मज़दूरों ने लूटपाट की, पुलिस पर पथराव किया इत्यादि।

ऊपर उठने के लिये कितना गिरेंगे लोग ......