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पैतृक संपत्ति में बहन को भाई के बराबर अधिकार
August 12, 2020 • DESK • NATIONAL

देश में कोरोना के मरीजों का आंकड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है और यह संख्या अब बढ़कर 23 लाख के करीब जा पहुंची है वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बिडने ने सांसद कमला हैरिस को उप राष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार चुना है साथ ही देश के कई हिस्से इस समय बाढ़ की समस्या का सामना कर रहे हैं. बॉलीवुड एक्‍टर संजय दत्‍त के फैंस के ल‍िए बुरी खबर आ रही है। एक्‍टर संजय दत्‍त को फेफड़ों का कैंसर होने की जानकारी मिल रही है। उनकी यह बीमारी 3rd स्‍टेज पर है। इस गंभीर बीमारी के इलाज के जल्‍द ही संजय दत्‍त व‍िदेश रवाना होंगे। राजस्थान में कैसे बदल रहा सियासी समीकरण? मशहूर शायर राहत इंदौरी का हार्ट अटैक से निधन, कोरोना के इलाज के लिए इंदौर के अस्पताल में भर्ती थे। राजस्थान में सचिन पायलट, कहा- पार्टी के खिलाफ न कभी कुछ किया, न कहा। कोरोना पॉजिटिव पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की हालत में सुधार नहीं, ब्रेन सर्जरी के बाद से वेंटिलेटर पर।रूस का कोरोना की पहली वैक्सीन बनाने का दावा, प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन की बेटी को लगा पहला टीका। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, कोरोना की जांच में तेजी लाएं राज्य। इस बीच, देश में कोरोना के केस साढ़े 22 लाख के पार। सुप्रीम कोर्ट का फैसला, पैतृक संपत्ति में बहन को भाई के बराबर अधिकार, भले ही पिता की मौत हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) कानून, 2005 लागू होने से पहले हो गई हो। सुशांत सिंह राजपूत केस में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा। अगली सुनवाई गुरुवार को। रिया चक्रवर्ती ने केस पटना से मुंबई ट्रांसफर करने का किया था अनुरोध। उधर, रिया के कॉल डेटा खंगाल रही सीबीआई।

CBDT ने एक बड़े रैकेट का खुलासा किया है जिसमें चीनी और भारतीय शेल कंपनियां हैं। इन दोनों के गठजोड़ एक हजार करोड़ से अधिक के मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला लेनदेन में शामिल रहे हैं।

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर ने माता वैष्णो देवी की यात्रा के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। यात्रा 16 अगस्त से शुरू हो रही है।

लखनऊ चारबाग रेलवे स्टेशन पर भीषण आग लग जाने से चारों तरफ अफरा तफरी का माहौल पैदा हो गया। इस आग में परिसर में लगा एक एटीएम जलकर राख हो गया।

सोना, अनिश्चितता से बचाने और महंगाई को मात देने के साथ-साथ उधार लेने में भी मदद करता है। कई लोगों को कोरोना वायरस संकट काल सोना के बदले लोन ले रहे हैं।

कर्नाटक के एक शख्स श्रीनिवास गुप्ता ने हाल ही में अपने नए घर में प्रवेश किया है वहां उन्होंने अपनी पत्नी माधवी की सिलिकॉन वैक्स स्टेच्यू की प्रतिमा लगवाई है जिनका एक एक्सीडेंट में निधन हो गया था.

उत्तर प्रदेश में बीते 24 घंटों के दौरान कोविड-19 के 5130 नए मामले सामने आए जबकि मंगलवार को मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 2176 हो गया। अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) अमित मोहन प्रसाद ने यह जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में उपचाराधीन मरीजों की संख्या 48,998 हो गई है। प्रदेश में 56 नई मौतें : उत्तर प्रदेश में 24 घंटों में 56 मरीजों ने कोरोनावायरस संक्रमण के कारण दम तोड़ दिया। इन्हें मिलाकर मरने वालों की संख्या 2176 पर पहुंच गई है। राज्य में कुल 80,589 लोग पूर्णतया स्वस्थ होकर अस्पतालों से छुटटी पा चुके हैं जबकि कुल कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 1,31,763 हो गया है। लखनऊ में सबसे ज्यादा मरीज सामने आए : बीते 24 घंटों में सबसे अधिक 831 नए मामले लखनऊ से आए। कानपुर नगर से 248, वाराणसी से 169, प्रयागराज से 252, गोरखपुर से 201, बरेली से 198, बलिया से 150, बस्ती से 227 और बाराबंकी से 116 नए मामले सामने आए हैं।

अगले 24 घंटों के दौरान तटीय कर्नाटक, केरल और दक्षिणी कोंकण गोवा में मध्यम से भारी बारिश की संभावना है। कुछ स्थानों पर मूसलाधार वर्षा हो सकती है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और मध्य भागों, दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और गुजरात के पूर्वी क्षेत्रों में भी हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी वर्षा के आसार हैं।पश्चिमी हिमालयी राज्यों, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, विदर्भ, आंतरिक कर्नाटक, अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह, लक्षद्वीप, ओडिशा, गंगीय पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है।सौराष्ट्र और कच्छ, रायलसीमा और तमिलनाडु में भी छिटपुट जगहों पर हल्की वर्षा हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2005 के हिंदू उत्तराधिकार कानून की (Hindu succession act) नई व्याख्या की है. इसके जरिए बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबर का अधिकार दिया गया है. फिर चाहे पिता की मृत्यु  2005 में नया कानून बनने के बाद हुई हो या फिर इस कानून के बनने से पहले पिता की मृत्यु हुई हो.दरअसल 2005 में हिंदू उत्तराधिकार कानून में संशोधन हुआ था. जिसमें पहली बार बेटियों को भी पैतृक संपत्ति में अधिकार दिया गया था. लेकिन ये अधिकार उन्हीं को मिलता था. जिनके पिता की मृत्यु 9 सितंबर 2005 के बाद हुई हो. 9 सितंबर 2005 को ही नया कानून लागू हुआ था और इसके बाद वाले मामलों में ही पिता की मृत्यु के बाद बेटियां, पैतृक संपत्ति पर दावा कर सकती थीं.मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच ने बेटियों के हक में अहम फैसला सुनाया. इसमें कहा गया है कि 9 सितंबर 2005 को संशोधन लागू के पहले भी अगर किसी व्यक्ति की मौत हो गई हो और उसकी संपत्ति का बंटवारा बाद में हो रहा है. तब भी उसकी संपत्ति में बेटियों को भी बराबर की हिस्सेदारी देनी होगी. कोर्ट ने इसमें तारीख और वर्ष वाली शर्त सुप्रीम कोर्ट में खत्म कर दी है.इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि बेटे तो सिर्फ शादी तक बेटे रहते हैं. लेकिन बेटी हमेशा बेटी ही रहती है. विवाह के बाद बेटों की नीयत और व्यवहार में बदलाव आ जाता है. लेकिन एक बेटी अपने जन्म से लेकर मृत्यु तक माता पिता के लिए प्यारी बेटी ही होती हैं. विवाह के बाद माता पिता के लिए बेटियों का प्यार और बढ़ जाता है. इसलिए बेटी पैतृक संपत्ति में बराबर हकदार बनी रहती है. भले ही उसके पिता जीवित हों या नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने ये बड़ा फैसला बहन-भाइयों के बीच संपत्ति के बंटवारे के एक मामले पर दिया है. इस केस में भाइयों ने बहन को ये कह कर संपत्ति में बराबर का हिस्सा देने से इनकार कर दिया था कि उनके पिता की मृत्यु 9 सितंबर 2005 से पहले हुई थी. इसलिए उनका कहना था कि उत्तराधिकार कानून का संशोधन इस मामले में लागू नहीं होगा, सुप्रीम कोर्ट ने ये साफ कर दिया कि बेटियों को हर हाल में बेटों के बराबर ही पैतृक संपत्ति में अधिकार मिलेगा. सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों के हाईकोर्ट से भी कहा है कि किसी भी कोर्ट में बेटियों के अधिकार से जुड़े लंबित मामलों की सुनवाई छह महीने में पूरी कर ली जाए, जिससे न्याय देने में देर न हो.

     हिंदू उत्तराधिकार कानून के मुताबिक संपत्ति दो तरह की होती है. एक संपत्ति पिता द्वारा खरीदी गई संपत्ति और दूसरी पैतृक संपत्ति होती है, जो पिछली 3 पीढ़ियों से परिवार को मिलती आई है. कानून के मुताबिक बेटा हो या बेटी, पैतृक संपत्ति पर दोनों का जन्म से बराबर का अधिकार होता है. इस तरह की संपत्ति को कोई पिता, अपने मन से किसी को नहीं दे सकता यानी किसी एक के नाम पर वसीयत नहीं कर सकता और ना ही बेटी को उसका हिस्सा देने से वंचित कर सकता है. अगर पिता ने कोई संपत्ति खुद अपनी आय से खरीदी है तो उसे अपनी इच्छा से किसी को भी ये संपत्ति देने का अधिकार है. लेकिन इस पर भी उसके बेटे और बेटी इस आधार पर आपत्ति कर सकते हैं. अगर उन्हें ये लगे कि पिता अनैतिक तरीके से ये संपत्ति किसी को देने की कोशिश कर रहा है. कानून के मुताबिक अगर पिता की मौत हो गई और उसने खुद अर्जित संपत्ति की वसीयत मृत्यु से पहले नहीं बनाई थी तो ऐसी स्थिति में उसकी संपत्ति उसके बेटे और बेटियों में बराबर बराबर बांटी जाएगी.

 

अभी तक जो कानून था, उसके मुताबिक 9 सितंबर 2005 के बाद पिता की मृत्यु होने पर ही बहन को भाई के बराबर, पिता की संपत्ति में हिस्सा मिलता था. लेकिन आज के फैसले के बाद 9 सितंबर 2005 से पहले भी अगर पिता की मृत्यु हुई है तो उस संपत्ति में भी बहन को भाई के बराबर हिस्सा मिलेगा. ये कानून बेटियों को बराबर का अधिकार और शक्ति देने वाला है. अभी तक हमारे समाज में बेटियों के साथ भेदभाव होता आया है. अक्सर घरवाले चाहते हैं कि जल्द से जल्द बेटी की शादी हो जाए. शादी के लिए दूसरे पक्ष से दहेज का भी दबाव होता है. इन दोनों पक्षों के बीच में अक्सर बेटियां फंस जाती है. कभी कभी ऐसी स्थिति भी बन जाती है कि ससुराल में बेटियां परेशान होती हैं. लेकिन उसके मायके वाले उस पर दबाव डालते हैं कि वो किसी तरह से भी अपने ससुराल में रहे. यानी जब बेटियां परेशानी में फंसती है तो उसे शरण देना वाला कोई नहीं होता. लेकिन पैतृक संपत्ति के अधिकार से उसे ताकत मिलती है और इस अधिकार से सम्मान के साथ जीने का ज़रिया मिलता है. कहने के लिए तो बेटियों को समाज में बराबर समझा जाता है. लेकिन ये बराबरी सिर्फ कहने के लिए होती है. जब पैसे का मामला आता है तो स्थितियां बदल जाती हैं. ये हमारे समाज का एक दोष है कि बेटियों को ऐसे अधिकार मिलने पर समाज का असली चरित्र दिख जाता है. पैतृक संपत्ति में अधिकार मिलने के बाद कई जगहों पर बेटियों को अब कहीं बड़ा बोझ माना जाने लगा. इस कानून के दुरुपयोग की भी आशंका हो सकती है. कई लोगों की सोच ये है कि पैतृक संपत्ति पर अधिकार से बेटियां अपने ससुराल पक्ष को ही आर्थिक तौर पर मजबूत करेंगी. लेकिन माता पिता के लिए बेटे ही सब कुछ होते हैं. जो परिवार की अर्जित संपत्ति को बढ़ाते हैं और बुढापे का सहारा बनते हैं. समाज की एक सोच ये भी है कि बेटियां जब तक पैतृक संपत्ति में अधिकार नहीं जताती. तब तक वो अपने परिवार के लिए अच्छी होती है लेकिन जैसे ही वो संपत्ति पर दावा करती है तो फिर मायके वालों के साथ उसका विवाद हो जाता है. कई बार बेटियां खुद ही पैतृक संपत्ति से दावा छोड़ देती हैं क्योंकि उसके पिता उसकी शादी पर खूब दहेज देते हैं और कई बार तो बेटी की शादी में अपनी जीवन भर की कमाई खर्च कर देते हैं. अक्सर महिलाएं इसलिए भी पैतृक संपत्ति पर दावा नहीं करती. जिससे शादी के बाद माता पिता और भाइयों के साथ उसके संबंध अच्छे बने रहें. इसलिए कई बार पैतृक संपत्ति पर अधिकार का कानून, व्यवहारिक तौर पर समाज में अमल में नहीं लाया जाता है. बहुत सारे लोग ये सवाल भी उठा रहे हैं कि पैतृक संपत्ति में बराबरी के अधिकार का कानून, सिर्फ़ एक धर्म के लोगों पर क्यों लागू है.  देश के सभी परिवारों पर ये कानून लागू होना चाहिए, जिससे देश की सभी महिलाओं को ये अधिकार मिले। इसलिए लोग देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता को लागू करने की मांग कर रहे हैं.

 

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