ALL International NATIONAL State ADMINISTRATION Photo Gallery Economy Education/Science & Technology Environment & Agriculture Entertainment Sports
अभिव्यक्ति की आज़ादी- प्रशांत भूषण अब जुर्माना भरने को तैयार
September 3, 2020 • DESK • NATIONAL

 विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले भारत में कोरोनावायरस संक्रमण के सर्वाधिक नए मामले सामने आ रहे हैं। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि भारत में पिछले 7 दिनों के दौरान कोरोना संक्रमण के करीब 5 लाख नए मामले सामने आए हैं जो कि दुनियाभर में सर्वाधिक हैं। भारत में कोरोना संक्रमण के नए मामलों में 7 दिनों के भीतर 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। डब्ल्यूएचओ ने बताया कि दुनिया में कोविड-19 के कारण होने वाली मौतों में 3 प्रतिशत की कमी आई है जबकि इस दौरान दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के नए मामलों में 18 लाख का इजाफा हुआ है।अमेरिका में इस महामारी का प्रकोप निरंतर बढ़ता ही जा रहा है, हालांकि अमेरिका के कुछ इलाकों में कोरोना संक्रमण के नए मामलों में थोड़ी कमी आई है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक पेरू, मैक्सिको, कोलंबिया और अर्जेंटीना ऐसे लैटिन अमेरिकी देश हैं जहां कोरोना संक्रमण के नए मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। यूरोप में पिछले सप्ताह के दौरान स्पेन, रूस, फ्रांस और यूक्रेन जैसे देशों में कोरोना संक्रमण के सर्वाधिक नए मामले सामने आए हैं। इटली में भी कोरोना के नए मामलों में 85 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। वहीं घाना, केन्या, गैबन और मेडागास्कर जैसे हॉटस्पॉट के इलाकों में कोरोना के नए मामलों में कमी आई है। इसके अलावा इराक, ईरान, मोरक्को, सऊदी अरब और कुवैत जैसे देशों में भी कोरोना संक्रमितों की संख्या में इजाफा हो रहा है। गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 11 मार्च को कोरोनावायरस (कोविड-19) को महामारी घोषित किया था। अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केन्द्र (सीएसएसई) की ओर से जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के 2.57 करोड़ से अधिक मामलों की पुष्टि हो चुकी है जबकि इस महामारी से 8.57 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश की अवमानना के मसले पर प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण पर एक रुपए का ज़ुर्माना लगाया है। ज़ुर्माना न भर पाने की सूरत में तीन महीने की क़ैद तथा साथ ही तीन साल के लिए वकालत पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। हालॉंकि माफी नहीं मॉंगने की बात कहने वाले भूषण अब जुर्माना भरने को तैयार हैं। इस फैसले को सुनकर प्रथम दृष्ट्या आपको लगेगा कि यह क्या हास्यास्पद फैसला है। एकदम बकवास, बोगस, विद्रुपतापूर्ण, सस्ता और प्रशांत भूषण के विरोध के आगे झुकता सा, हार मानता सा, घुटने टेकते सा फैसला। लेकिन यह असल में वैसा नहीं है जैसा कि यह ऊपर-ऊपर से लग रहा है। सुप्रीम-कोर्ट की इस बेंच ने दुनिया के सुप्रीम-कोर्ट्स के इतिहास में पहली बार वह किया, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। दुनिया के न्यायालय हमेशा प्रतिरोध की आवाज़ और एकेडमिक घेरेबंदी के आगे बौने साबित हुए हैं। दुनिया में हर बार न्यायालय सत्तावादी विमर्श में शोषक और निर्मम साबित किए जाते रहे हैं। दुनिया का हर इतिहास ऐसी घटनाओं और उदाहरणों से भरा पड़ा है। लेकिन भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस शानदार फैसले में मानो कलम तोड़ दी हो। प्रशांत भूषण ने अपनी सूझबूझ और रणनीति से सुप्रीम कोर्ट को विराट सत्ता और शोषण के रूपक की तरह चित्रित कर दिया था। पूरी दुनिया में भारत का सुप्रीम कोर्ट अभिव्यक्ति की आज़ादी और जनता की आवाज़ को दबाने वाली इकाई की तरह दिखने लगा था। प्रशांत ने इंग्लैंड और अमेरिका तक में अपने लिए समर्थन का जुगाड़ कर लिया। इस खूबसूरत घेरेबंदी के बाद अगर प्रशांत को सुप्रीम कोर्ट सज़ा देता तो यह एक सत्तावादी धड़े का एक जनवादी वकील पर सत्ता का इस्तेमाल करके आवाज़ दबाना होता। यानी फिर एक न्यायालय का परास्त होना होता। कानून की नज़र में सुप्रीम कोर्ट अथवा बार काउंसिल अपनी पीठ और नैतिकता को ज़रूर सहला लेते, थपथपा लेते लेकिन, अभिव्यक्ति के नज़रिए से, अभिव्यक्ति के माध्यमों और अभिव्यक्ति के मंचों पर भारत का सुप्रीम कोर्ट भारत की सरकार का सबऑर्डिनेट सिद्ध हो जाता और भारत और उसके न्याय की विश्वसनीयता दुनिया की नज़र में दो कौड़ी की हो जाती। प्रशांत के इस अकेले कदम से मोदी और उनकी सरकार की छवि को बड़ा धक्का लगता और यह भी कि चुनाव जीत कर आने के बाद मोदी सरकार ने संवैधानिक संस्थाओं पर कब्ज़ा जमाकर देश को तानाशाही दे दी है- का रूपक लोगों में घर कर जाता। वैसे भी, पहले से ही हिन्दुत्ववादी सत्ता विमर्श और बहुसंख्यक शक्ति के बल पर देश में लोकतंत्र की हत्या का एकेडेमिक्स रूपक दुनियाभर के ज्ञानजगत और अभिव्यक्ति के मंचों पर सिर चढ़कर बोल रहा है। इन मंचों पर प्रधानमंत्री मोदी की किम जोंग से कम की छवि नहीं है। पूरी दुनिया में मार्क्सवादी एकेडेमिक्स को प्रतिरोध की भाषा का मास्टर माना जाता है। भारत में शाहीनबाग के समय छात्रा का लाठीधारी पुलिसवाले को गुलाब देती तस्वीर ने जैसे इस गुण को उच्चता दे दी थी। वह एक शानदार प्रयोग था। पूरी दुनिया की मीडिया ने उस तस्वीर का इस्तेमाल किया था और भारत की सरकार की पुलिस की बर्बरता के बरअक्स छात्रों का गाँधीवादी विरोध एक शानदार रूपक बन गया था। प्रशांत भूषण ने भी पिछले दिनों से सरकार के खिलाफ़ अपनी प्रतिबद्धता को पुरज़ोर तरीके से प्रकट किया है। वे लगातार सरकार के तमाम फैसलों के विरुद्ध कोर्ट में अथवा अभिव्यक्ति के विभिन्न मंचों पर जाते रहे हैं। अयोध्या श्रीराम मंदिर मसले पर भी वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ़ थे। इसी कड़ी में प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस पर आपत्तिजनक ट्वीट किए थे। उस ट्वीट के निहितार्थ थे कि सुप्रीम कोर्ट के जज भाजपा सरकार से अनुग्रहित हैं। इसका सीधा अर्थ है कि भारत का उच्चतम न्यायालय संविधान की नहीं, सरकार की चाकरी कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा घटना का संज्ञान लेने पर प्रशांत का माफी माँगने से इनकार करना और उसे सत्ता द्वारा उनकी आवाज़ दबाने के प्रयत्न की तरह प्रचारित करना, एक ऐसा दबाव था जिसके आगे सुप्रीम कोर्ट बौना हो सकता था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में प्रशांत और उनकी तमाम कोशिशों को पटकनी दे दी है। अब प्रशांत भूषण अगर ज़ुर्माना भरते हैं तो यानी अपनी ग़लती मानते हैं, जिससे उनकी नैतिक और रणनीतिक हार होती है, क्योंकि उन्होंने सप्रीम कोर्ट की जो क्रूर और सत्तावादी चाकर की छवि बनाई थी उस पर आघात लगता है और नहीं देते हैं तो जेल और 1095 दिनों तक वकालत के क्षेत्र से प्रतिबंधित होने का दंश झेलने को बाध्य होंगे। भारत के हर दूसरे मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रहने वाले एक्टिविस्ट वकील के लिए यह सज़ा फाँसी से कम नहीं है। ऐसे देखें तो प्रशांत भूषण के नहले पर सुप्रीम कोर्ट ने दहला मारा है। एक शोषक, सत्तावादी चाकर का सारा रूपक एक रुपए के ज़ुर्माने की रकम के आगे भरभरा जाएगा। शोषण और आवाज़ दबाने के विमर्श को एक रुपया कमज़ोर कर देगा। अगर ज़ुर्माने की रकम एक, दो, दस या बीस लाख होती तो यकीनन प्रशांत को रणनीतिक बढ़त मिलती, लेकिन एक रुपए ने उनकी रणनीति को धता बताते हुए सुप्रीम कोर्ट को बढ़त दे दी है। प्रशांत के गाँधीवाद के बरअक्स सुप्रीम कोर्ट ने गाँधीवाद की बड़ी लकीर खींचकर अपने सयानेपन का सबूत दिया है। जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षा में जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने प्रशांत के गाँधीवादी घेरेबंदी का बेहतरीन तोड़ निकालकर यह साबित कर दिया कि भारत का सुप्रीम कोर्ट किसी भी किस्म के बाहरी दबाव या रणनीति को बेहतरीन ढंग से काउंटर कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट को भारत के संविधान का प्रहरी यूँ ही नहीं कहा जाता। यह फैसला देकर जजों ने अपनी सूझबूझ का परिचय तो दिया ही है, साथ ही किसी भी लोकतंत्र में नकारात्मक प्रेशर-ग्रुप्स को भी एक शानदार मैसेज दिया है कि वे कोर्ट को कोई हलवा न समझें। दो मज़बूत पक्षों की लड़ाई में एक लोकतांत्रिक संस्था की सूझबूझ और समझदारी को देखकर भारतीय लोकतंत्र को गर्व हो सकता है।

 

राममंदिर निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही विश्व हिन्दू परिषद  अपने अगले ऐजेंडे की ओर आगे बढ़ने लगी है। लव जिहाद, धर्मांतरण के साथ छुआछूत को खत्म करने जैसे मुद्दे को और धार देने की रणनीति बन रही है। हालांकि संगठन से जुड़े लोगों का मानना है कि छुआछूत विरोधी अभियान को संतो के माध्यम से 1990 से चलाया जा रहा है, बस अब इसमें गति देने की तैयारी है। इसके लिए भी संतो के सहारे आगे बढ़ने की योजना है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सूत्र बताते हैं कि पिछले दिनों दलितों के साथ हुई घटनाओं को लेकर विपक्षी दल वोट बैंक के लालच में उन्हें बरगलाने के प्रयास में लगातार आंदोलन कर रहे हैं। संघ परिवार की कहीं न कहीं विरोधियों की जाति के सियासी गणित पर भी नजर है। विश्व हिन्दू परिषद कई एजेंडे को आगे बढ़ाने में लगा हुआ है जिसमें कोरोना संकट थमने के बाद दलित बस्तियों में सहभोज भी शामिल है। बस्तियों और घरों में संतो का सामूहिक भोजन की योजना तैयार की गयी है। विहिप के पदाधिकारी छुआछूत के खिलाफ अभियान कोरोना संकट के बीच संतो को लेकर बस्तियों में जाकर अपने तथ्यों और तकरें के हिसाब से आगे बढ़ाएंगे। विहिप इस बात को लेकर लोगों को जागरूक करेगा कि छुआछूत हिन्दू संस्कृति का हिस्सा नहीं है। विहिप के धर्म प्रसार विभाग के क्षेत्र प्रमुख भोलेन्द्र ने बताया, छुआछूत के खिलाफ अभियान एक संयुक्त अभियान है। इसमें दुर्गावाहिनी, बजरंग दल, समरसता विभाग, धर्माचार्य, सेवा, सारे आयाम मिलाकर धर्म प्रसार के साथ काम कर रहे हैं। यह अभियान शुरू हो गया है। इसके लिए जिला चयनित किया गया है। अभी कुछ जिलों के ब्लाकों में यह विशेष अभियान चलाया जाएगा। समरसता विभाग बस्तियों में सहभोज आयोजित करेगा। इसके अलावा वाल्मिकि, अम्बेडकर, समेत अन्य महापुरूषों की जयंतियों को मनाया जाएगा। रामजन्म भूमि केन्द्र बिन्दु में होने के कारण उप्र में अभी तक प्लानिंग के आधार पर कोई काम नहीं हुआ है। भोलेन्द्र ने बताया कि सर्वे होगा कि मिशनरी के कितने सेंटर हैं और वो क्या क्या कर रहे हैं। सर्वे कराया जाएगा कि मलिन बस्तियों में ग्रामीणों का धर्मांतरण तो नहीं हो रहा है।उन्होंने बताया कि उप्र में अभी तक राममंदिर का मुद्दा प्रमुख रहा है। इसीलिए अन्य एजेंडे जैसे धर्मांतरण, लैंड जिहाद, लव जिहाद जैसे मुद्दे पर काम जैसा होना चाहिए वैसा नहीं हो सका है। छुआछूत विरोधी समरसता अभियान पर ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है। इसके लिए हमारे पास संतो की पूरी टोली है। जो जिले-जिले जाकर लोगों को समझाने का प्रयास करेगी। इसके लिए टोलियां बनायी जा रही है। वहीं, सर्वे और अन्य गतिविधियों पर भी काम होगा। अभी हरदोई, लखीमपुर, रायबरेली, सीतापुर, लखनऊ समेत अन्य कई जिलों में यह अभियान चलाया जाएगा। हमारा पूरा प्रयास है कि हिन्दू समाज किसी प्रकार से बंटे नहीं।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस के मामले एक बार फिर बढ़ रहे हैं, ऐसे में ICU बिस्तर का संकट मुश्किलें बढ़ा सकता है। अनलॉक 4 में पहले से ही है लोग ज्यादा बाहर निकल रहे हैं।

चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। अब चीन के विदेश मंत्रालय ने भारत पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पार करने और उकसावे की कार्रवाई करने का आरोप लगाया है।

भारत सरकार ने 118 अतिरिक्त चीनी ऐप्स के साथ PUBG पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसी रिपोर्ट थी कि PUBG भारत सरकार के रडार पर था। लद्दाख की गलवान घाटी में भारत-चीन के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने यह फैसला लिया।

प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में आज कैबिनेट की बैठक हुई जिसमें कई अहम फैसले लिए गए हैं, सबसे महत्वपूर्ण केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के लिए राजभाषा बिल लाने की मंजूरी दी है। मिशन कर्मयोगी योजना को हरी झंडी.

इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बिहार में जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा का जेडीयू के साथ गठबंधन हो गया है।

दुनिया में बहुत से लोग अमीर हैं लेकिन वॉरेन बफेट एक मात्र व्यक्ति है जिन्होंने निवेश के बल पर अमीर बने हैं। जानिए उनके अमिर बनने के टिप्स।

लोन मोरेटोरियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में फिर सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि मोरेटोरियम की योजना के तहत EMI भुगतान टालने के लिए ब्याज पर ब्याज लेकर ईमानदार कर्जदारों को दंडित नहीं कर सकते।

प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के बेहद कम कीमत में घरों की बुकिंग शुरू हो गई। रजिस्ट्रेशन के लिए आखिरी तारीख 15 अक्टूबर है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मात्र 3.50 लाख रुपए में मिलेगा घर.

कोविड की वजह से इस दफा मानसून सेशन में प्रश्नकाल नहीं होगा। दोनों सदनों में कार्यवाही दो शिफ्ट में होगी। लेकिन कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आपत्ति जताई है।

यदि आप भी ऑनलाइन पेमेंट करते हैं और यूपीआई के जरिए कैश ट्रांसजेक्शन करते हैं तो सतर्क हो जाएं। यदि बैंक यूपीआई पेमेंट करने पर कोई चार्ज वसूल कर रहे हैं तो तत्काल आप इसके खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सरकार के निर्देश के बाद भी रुपे कार्ड या भीम-यूपीआइ से लेनदेन पर शुल्क वसूल रहे बैंकों को आयकर विभाग ने सख्त हिदायत दी है। विभाग ने कहा है कि पहली जनवरी से अब तक इस मद में वसूला गया शुल्क रिफंड करें। साथ ही भविष्य में ऐसे लेनदेन पर शुल्क कतई नहीं वसूलें। डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने और अर्थव्यवस्था में नकदी कम करने के उद्देश्य के साथ पिछले साल सरकार ने इस संबंध में निर्देश जारी किए थे। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से लेनदेन में शुल्क लेने या नहीं लेने से संबंधित आयकर कानून की धारा 269-एसयू के संबंध बैंकों को सर्कुलर जारी किया है। इसमें कहा गया है कि बैंक इन माध्यमों से होने वाले लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लेंगे। डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने फाइनेंस एक्ट, 2019 में धारा 269-एसयू के रूप में नया प्रावधान जोड़ा है। इसके तहत पिछले साल में 50 करोड़ रुपये या इससे ज्यादा का कारोबार करने वालों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे तय इलेक्ट्रॉनिक मोड से भुगतान स्वीकार करें। इसमें तय इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के विकल्पों के तौर पर रुपे डेबिट कार्ड, यूपीआइ (भीम-यूपीआइ) और यूपीआइ क्यूआर कोड को चिन्हित किया गया है। सीबीडीटी ने कहा कि दिसंबर, 2019 में यह स्पष्ट कर दिया गया था इन चिन्हित इलेक्ट्रॉनिक मोड से भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके बाद भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं कि कई बैंक अलग-अलग तरीके से इस मद में शुल्क की वसूली कर रहे हैं। कुछ बैंक एक निश्चित संख्या तक लेनदेन पर शुल्क नहीं वसूलते हैं और उसके बाद सभी लेनदेन पर वसूली करते हैं। प्रावधानों का यह उल्लंघन दंडनीय है। बैंकों को इस मद में वसूला शुल्क रिफंड करना होगा।

फेसबुक के कथित पक्षपात को लेकर पैदा हुए विवाद के बीच इस सोशल मीडिया मंच के भारत प्रमुख अजीत मोहन से बुधवार को एक संसदीय समिति ने करीब दो घंटे तक पूछताछ की। समिति में भाजपा और कांग्रेस के सदस्यों ने फेसबुक पर सांठगांठ करने और विचारों को प्रभावित करने का आरोप लगाया, जिसका कंपनी ने खंडन किया।भाजपा के सदस्यों ने फेसबुक के कर्मचारियों के कथित राजनीतिक संबंधों को लेकर सवाल उठाए और दावा किया कि कंपनी के कई वरिष्ठ अधिकारी कांग्रेस और उसके नेताओं के लिए अलग अलग तरीकों से काम कर चुके हैं, जबकि विपक्षी सदस्यों ने पूछा कि घृणा भाषण वाले वीडियो और सामग्री अब भी ऑनलाइन उपलब्ध क्यों है? तथा सोशल मीडिया कंपनी ने इन्हें हटाया क्यों नहीं? मोहन से समिति के सत्तारूढ़ और विपक्षी सदस्यों ने पूछताछ की। मोहन ने कुछ सवालों का मौखिक जवाब दिया, जबकि उन्हें तकरीबन 90 सवाल दिए गए हैं जिनका जवाब उन्हें लिखित में देना है।

अगले 24 घंटों के दौरान मध्य प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक के शहरों में मॉनसून व्यापक रूप में सक्रिय रहेगा। इन भागों में मध्यम से भारी बारिश के आसार हैं। पश्चिमी राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, पूर्वोत्तर भारत, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में कुछ जगहों पर हल्की बारिश के साथ एक-दो स्थानों पर मध्यम बौछारें गिर सकती हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी छिटपुट वर्षा के आसार हैं। जबकि गुजरात में मौसम मुख्यतः शुष्क रहेगा।

Ayodhya temple map passed by ADA

Goa CM Pramod Sawant tests coronavirus positive

India reeling under 'Modi-made disasters': Rahul

UP govt 'stubborn like a child', can frame me in another case: Kafeel Khan up on release from jail

Welcome release of Kafeel Khan, hope Azam Khan, framed in false cases, will get justice: Akhilesh

NIA files charge sheet against five people for alleged links with an ISIS affiliate

Depriving states of GST compensation attempt to undermine federalism: Mamata to PM

Manjhi to join NDA, angles for 10 assembly seats

Subramanian Swamy takes a dig at Mahesh Bhatt

Govt not running away from debate: Par Affairs Minister Joshi

Malicious campaign by few channels to defame Sushant's family, benefit Rhea: lawyer

Govt bans 118 more mobile apps, including PUBG

Border tension: India, China hold another round of Brigade Commander-level talks

No Question Hour, pvt members' bills, curtailed Zero Hour during Parliament's monsoon session