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हांगकांग मे प्रत्यर्पण का विरोध , प्रजातन्त्र की मांग
August 20, 2019 • Desk

 

पुलिस ने हांगकांग सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट तक 3.7 किमी लंबा मार्च निकालने की इजाजत नहीं दी

हांगकांग में विरोध प्रदर्शन अपने चरम पर है। सड़कों पर हो-हल्ला मचा हुआ है। हवाईअड्डे पर सारी उड़ानें रद्द हैं। यहां तक कि प्रदर्शनकारियों ने दो दिन पहले हवाईअड्डे पर भी कब्जा कर लिया था। पिछले कई दिनों से यहां की सड़कों पर लाखों लोग प्रदर्शन कर रहे हैं और इन प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व जिसके हाथ में है, वो महज एक 23 साल का दुबला-पतला सा लड़का है, लेकिन अपने साहस और हौसले के दम पर उसने चीन सरकार की नाक में दम कर दिया है।
        साल 2014 में जोशुआ वांग तब दुनिया की नजरों में आए थे, जब उन्होंने 'अम्ब्रेला मूवमेंट' चलाया था। इसमें हांगकांग में लोकतंत्र की मांग और मतदान के अधिकारों में बढ़ोतरी की मांग की गई थी। तब उनकी उम्र महज 19 साल थी। इसी आंदोलन के कारण प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका टाइम ने जोशुआ का नाम साल 2014 के सबसे प्रभावी किशोरों में शामिल किया था। सिर्फ यही नहीं, साल 2015 में फॉर्च्युन मैगजीन ने उन्हें 'दुनिया के महानतम नेताओं' की श्रेणी में शामिल किया था। इसके अलावा पिछले साल यानी साल 2018 में वांग नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भी नामित किए गए थे। तब उनकी उम्र महज 22 साल थी। जोशुआ फिलहाल हांगकांग की राजनीतिक पार्टी डेमोसिस्टो के महासचिव हैं। उन्होंने महज 19 साल की उम्र में यह पार्टी बनाई थी। 
क्यों हो रहा प्रदर्शन? पिछले दिनों हांगकांग प्रशासन एक विधेयक लेकर आया था, जिसके मुताबिक अगर हांगकांग का कोई व्यक्ति चीन में कोई अपराध करता है या प्रदर्शन करता है तो उसके खिलाफ हांगकांग में नहीं बल्कि चीन में मुकदमा चलाया जाएगा। बस फिर क्या था, जोशुआ वांग (23) के नेतृत्व में हांगकांग के युवाओं ने इस विधेयक के खिलाफ बिगुल फूंक दिया और सड़कों पर उतर चीन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने लगे। देखते ही देखते हांगकांग की सड़कों पर लाखों की संख्या में युवा जमा हो गए। दरअसल, हांगकांग की युवा आबादी को लगा कि चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी इस विधेयक के जरिए हांगकांग पर अपना दबदबा कायम करना चाहती है। हालांकि लगातार और जोरदार प्रदर्शन को देखते हुए हांगकांग की सरकार ने विधेयक तो वापस ले लिया, लेकिन युवाओं का आंदोलन खत्म नहीं हुआ। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि हांगकांग में लोकतांत्रिक व्यवस्था चीन के आलोचक फिलीपीन के पूर्व मंत्री को हांगकांग में प्रवेश करने से रोका. वहीं दूसरी ओर, फिलीपीन के पूर्व विदेश मंत्री अल्बर्ट डेल रोसारियो को शुक्रवार को हांगकांग में प्रवेश करने से रोक दिया गया। आलोचकों ने इसे दक्षिण चीन सागर पर चीन के जबरन दावे को लेकर रोसारियो द्वारा किए गए विरोध का प्रतिशोध बताया। चीन के खिलाफ दो प्रमुख कानूनी पहलों के पीछे डेल रोसारियो का हाथ था, जिसमें एक अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण में 2013 का मामला भी शामिल है, जिस मामले में न्यायाधिकरण ने अंततः संसाधन-संपन्न जलमार्ग पर चीन के दावे के खिलाफ फैसला सुनाया था।

       यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब हांगकांग में प्रस्तावित विधेयक को लेकर लोगों का गुस्सा अभी भी उबाल पर है। इस विधेयक में चीन को मुख्य भूमि पर प्रत्यर्पण की अनुमति दी गई थी। विधेयक को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। डेल रोसारियो ने कहा कि उन्होंने एक फिलीपीन राजनयिक पासपोर्ट का उपयोग करके शुक्रवार की सुबह हांगकांग के लिए उड़ान भरी, लेकिन पहुंचने पर उन्हें एक आव्रजन होल्डिंग क्षेत्र में ले जाया गया, जहां वह लगभग साढ़े तीन घंटे तक रहे।

डेल रोसारियो की वकील ऐनी मैरी कोरोमिनास ने बाद में एएफपी को बताया, ''उन्हें रोक दिया गया और निर्वासित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने उन्हें प्रवेश से इनकार करने के लिए कोई कारण नहीं बताया और वापस फिलीपीन की उड़ान से भेज दिया गया। वह शुक्रवार शाम मनीला में उतरे।
हांगकांग में रविवार को चीन सरकार के खिलाफ एक बड़ी रैली का आयोजन किया गया. लाखों प्रदर्शनकारी सड़कों पर आ गए और उन्होंने सरकार के खिलाफ नारे लगाए. यह विरोध प्रदर्शन लगातार ग्यारह हफ्ते से चल रहा है. प्रशासन ने विक्टोरिया पार्क में रैली करने की इजाजत दी थी.

पुलिस ने हांगकांग सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट तक 3.7 किमी लंबा मार्च निकालने की इजाजत नहीं दी थी, लेकिन विक्टोरिया पार्क की रैली आखिरकार मार्च में बदल गई और लोग बिखरकर आसपास की सड़कों से सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट सेंटर की ओर बढ़ने लगे. भारी बारिश के बावजूद जनता का उत्साह ठंडा नहीं पड़ा और सड़कों पर हजारों की संख्या में रंगीन छाते नजर आने लगे. प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे थे- 'कैरी लैम, स्टेप डाउन' (कैरी लैम, कुर्सी छोड़ो). कैरी लैम हांगकांग के चीफ एग्जिक्यूटिव हैं.

गौरतलब है कि गुरुवार को हांगकांग बॉर्डर के पास चीनी सेना ने परेड किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ही इसकी घोषणा की थी. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि हमारी इंटेलिजेंस ने हमें बताया है कि चीन की सरकार हांगकांग की सीमा की ओर सेना बढ़ा रही है. सभी लोग शांत और सुरक्षित रहें. इस खबर के आने के बाद चीनी विरोधी प्रदर्शनकारियों की संख्या और बढ़ गई है.

हांगकांग में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन अपने चरम पर है, डेमोसिस्टो नाम का संगठन इस आंदोलन की अगुवाई कर रहा है. डेमोसिस्टो युवाओं का एक संगठन है, हांगकांग में लोकतंत्र के समर्थन में प्रदर्शन करता है. जोशुआ वांग, एग्निस चो और नाथन लॉ डेमोसिस्टो के नेता हैं.
[20/08, 10:54] Ved Prakash: आलोचकों के मुताबिक नया संशोधन हांगकांग के लोगों को भी चीन की दलदली न्यायिक व्यवस्था में धकेल देगा जहां राजनीतिक विरोधियों पर आर्थिक अपराधों और गैर परिभाषित राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरों जैसे मामलों में आरोप लगाए जाते रहे हैं. आलोचक मानते हैं कि चीन में एक बार आरोप लगा तो व्यक्ति को ऐसी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होता है जहां अधिकांश आपराधिक मामले सजा पर समाप्त होते हैं. इस नए प्रत्यर्पण कानून का विरोध करने वालों में कानूनविद्, कारोबारी, मानव अधिकार कार्यकर्ताओं समेत कई आम लोग भी हैं जिनके लिए हांगकांग में कानून का शासन सबसे अहम हैं. वहीं हांगकांग की चीफ एक्जेक्यूटिव कैरी लैम ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि मानवाधिकारों को सुनिश्चित करने वाली सभी बातें कानून में जोड़ी गई हैं.

क्या है प्रत्यर्पण कानून

हांगकांग के मौजूदा प्रत्यर्पण कानून में कई देशों के साथ इसके समझौते नहीं है. इसके चलते अगर कोई व्यक्ति अपराध कर हांगकांग वापस आ जाता है तो उसे मामले की सुनवाई के लिए ऐसे देश में प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता जिसके साथ इसकी संधि नहीं है. चीन को भी अब तक प्रत्यर्पण संधि से बाहर रखा गया था. लेकिन नया प्रस्तावित संशोधन इस कानून में विस्तार करेगा और ताइवान, मकाऊ और मेनलैंड चीन के साथ भी संदिग्धों को प्रत्यर्पित करने की अनुमति देगा.

हांगकांग की नेता कैरी लैम का कहना है कि ये बदलाव जरूरी हैं ताकि न्याय और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा किया जा सके. उन्होंने कहा कि अगर ऐसे बदलाव नहीं किए गए तो हांगकांग "भगोड़ों का स्वर्ग" बन जाएगा. संशोधन में पक्ष में खड़े लोग उस मामले की मिसाल दे रहे हैं जब हांगकांग के एक व्यक्ति ने पुलिस के सामने माना था कि उसने ताइवान यात्रा में अपनी गर्लफ्रेंड को मार दिया था और फिर वापस हांगकांग आ गया. लेकिन हांगकांग और ताइवान के बीच प्रत्यर्पण संधि ना होने के चलते उसे ताइवान नहीं भेजा जा सका. हालांकि मनी लॉड्रिंग के अपराध में वह हांगकांग में अब भी सजा काट रहा है.