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युवराज सिंह ने लिया इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास 
June 11, 2019 • desk

युवराज सिंह ने लिया इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास 

       

टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज युवराज सिंह ने 10 जून को इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले लिया। यह बात मीडिया में आते ही हर तरफ आग की तरह फैल गई। फैंस से लेकर बॉलीवुड सेलेब्स, क्रिकेटर ने यूवी को सोशल मीडिया पर मोटिवेशनल मैसेज भेजने लगे। अनुष्का शर्मा, नेहा धूपिया सहित कई बॉलीवुज एक्ट्रेस ने यूवी को सोशल मीडिया पर मोटिवेशनल मैसेज सेंड किये। युवराज की पत्नी हेजल कीच ने भी युवी के लिए इमोशनल पोस्ट शेयर किया है। हेजल ने लिखा- एंड ऑफ ऐरा...मुझे आप पर पर गर्व है पति.. अब जिंदगी की नई चेप्टर की शुरुआत है... लव यू...

   टीम इडिया के स्टार बल्लेबाज़ और भारत को 2011 वर्ल्ड कप जिताने में अहम भूमिका निभाने वाले मैन ऑफ द सीरीज़ युवराज सिंह ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। 37 वर्षाय युवराज ने अपने बेहतरीन बल्लेबाज़ी और फीलडिंग के दम पर टीम इंडिया को कई मुक़ाबले जिताए। युवराज ने इंटरनेशनल करियर की शुरुआत साल 2000 में केन्या के ख़िलाफ़ किया था। 2007 के टी 20 वर्ल्ड कप में भी अपना अहम योगदान दिया। इसी सीरीज़ में उन्होने 6 गेंदों पर 6 छक्के लगाकर ऐतिहासिक पारी खेली थी जिसे कोई नहीं भूल सकता। 2011 में युवराज ने कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लड़ते हुए भारत को वर्ल्ड कप जिताने में अहम भूमिका अदा की.

स्केटिंग चैंपियन से दमदार और स्टाइलिश क्रिकेटर बनना। फिर खुद को वर्ल्ड कप का हीरो साबित करके तुरंत कैंसर को झेलना और उसे भी हराना। शीर्ष के कई क्रिकेटर्स की तरह युवराज सिंह का करियर भी उतार-चढ़ाव से भरा रहा। युवी ने भले ही सोमवार को संन्यास ले लिया लेकिन उनकी कुछ पारियां और किस्से हमेशा याद किए जाएंगे। इनमें से कुछ हम यहां बता रहे हैं। तब युवी ने अंडर 19 में अच्छा खेल दिया जिसकी वजह से टीम इंडिया की इंटरनैशन टीम में उन्हें जगह मिल गई। तब साल था 2000 और मौका था आईसीसीसी नॉकआउट ट्रोफी का। युवराज को केन्या के खिलाफ प्री-क्वॉर्टर फाइनल में डेब्यू करने का मौका मिला। हालांकि, उस मैच में युवी की बैटिंग नहीं आई। उनसे गेंदबाजी करवाई गई जिसमें उन्हें कोई सफलता नहीं मिली। आमतौर पर पहले ही मैच में कुछ खास न करने का प्रेशर युवा खिलाड़ी पर होता ही है। लेकिन अगले मैच में ही युवी ने खुद को साबित कर दिया। दूसरा मैच ऑस्ट्रेलिया (क्वॉर्टरफाइनल) से हुआ। इसमें युवी ने शानदार 84 (80 गेंद) रन बनाए। इसके लिए उन्हें मैन ऑफ द मैच मिला। युवी ने ग्लेन मैग्रा, ब्रेट ली और जेसन गिलेस्पी जैसे तेज गेंदबाजों का डंटकर मुकाबला किया और भारत 20 रनों से यह मैच जीत गया। 

       भारतीय टीम की फील्डिंग शुरुआत से कुछ खास नहीं रही। फिर 1989 में डेब्यू करनेवाले रॉबिन सिंह ने अजय जडेजा के साथ मिलकर आउटफील्ड में कमाल दिखाया। दोनों के बाद यह जिम्मेदारी युवी और कैफ ने संभाली। साल 2000 में जब भारतीय टीम के खिलाड़ियों को धीमे फील्डर्स माना जाता था तब युवी और कैफ अवतार की तरह सामने आए। युवी ने 2000 का अंडर 19 वर्ल्ड कप कैफ की कप्तानी में खेला था और टीम उस साल चैंपियन बनी थी। तब से ही दोनों का तालमेल अच्छा था जो अंत तक चला। महान फील्डर्स जोंटी रोड्स भी मानते हैं कि इन दोनों खिलाड़ियों ने टीम इंडिया की फील्डिंग को बदलकर रख दिया। 
फ्लिंटॉफ का गुस्सा ब्रॉड पर उतरा, लगाए 6 छक्के 
बात 2007 की है। टी20 वर्ल्ड कप में भारत और इंग्लैंड का मेच हो रहा था। युवराज और धोनी बल्लेबाजी कर रहे थे तभी फ्लिंटॉफ युवी को छेड़ने लगे। बातों-बातों में दोनों के बीच बहस होने लगी जिसे अंपायर ने शांत करा दिया। फिर युवराज ने बल्ले से जवाब देते हुए स्टुअर्ट ब्रॉड की गेंद पर 6 छक्के लगा दिए। मैच में युवी ने सिर्फ 12 बॉल में फिफ्टी भी मारी थी। यह सिर्फ टी20 ही नहीं इंटरनैशनल क्रिकेट में सबसे तेज फिफ्टी है। 
        2011 वर्ल्ड कप से पहले युवराज का फॉर्म बहुत ज्यादा खास नहीं चल रहा था। फिटनेस भी उनके लिए चुनौती बनती जा रही थी। वर्ल्ड कप से पहले तो युवराज को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में मौका ही नहीं मिला था, लेकिन वर्ल्ड कप में युवी ने खुद को साबित किया और हीरो बन गए। सीरीज में उन्होंने 362 रन बनाए जिसमें 1 शतक, 4 अर्धशतक और 15 विकेट शामिल थे। इसके लिए उन्हें चार मैन ऑफ द मैच और फिर प्लेयर ऑफ द टूर्नमेंट दिया गया। भारत के बाकी लोगों की तरह युवी भी सचिन के फैन थे। लेकिन वर्ल्ड कप जीतने के बाद जब युवी ने कहा कि यह वर्ल्ड कप वह सचिन के लिए जीतना चाहते थे तो सब हैरान रह गए थे। 

          वर्ल्ड कप के दौरान ही युवी की तबीयत बिगड़ने लगी थी। लेकिन उन्होंने किसी को इसका अहसास नहीं होने दिया। फिर साल 2011 में ही खबर आ गई कि युवी को कैंसर है। यह खबर उनके फैंस के साथ-साथ युवी के लिए भी चौंकानेवाली थी। फिर भी परिवार और खास दोस्तों की वजह से युवराज ने कैंसर को हराया और बाकी लोगों को इसकी प्रेरणा दी। युवराज बताते हैं कि उस वक्त में सबसे ज्यादा मेहनत उनकी मां ने की और खुद कभी कमजोर न पड़ते हुए उन्हें नई जिंदगी दिलाई।