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बेखौफ बिलडरों का बढ़ता हौसला
March 18, 2019 • संदीप पांडेय
लखनऊ, ओमैक्स ने लखनऊ के ग्राम कल्ली पश्चिम में अवैध रूप से नहर पाट कर सड़क निर्माण किया :
        संविधान का उल्लंघन करते हुए जिस तरह से तालाब और नहर को पाटा जा रहा है वह कानून की दयनीय स्थिति और बढ़ते हुए भ्रष्टाचार की ओर इंगित करता है और उसी का जीता जागता प्रकरण है ग्राम क्रं. 113558 ग्राम कल्ली पश्चिम बिजनौर तहसील सरोजिनी नगर जनपद लखनऊ फसली वर्ष 1417-1422 भाग 1, खाता खतौनी क्रम सं. 5126 के अंतर्गत खसरा सं. 3312 में 1.1910 हेक्टेयर और खसरा सं. 3339 में 1.5670 हेक्टेयर भूमि नहर (कल्ली माइनर) के रूप में दर्ज है पर यह विडम्बना है कि यह नहर सिर्फ कागजों पर ही अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। इस नहर का सम्पूर्ण स्वामित्व सिंचाई विभाग का है तथा अवैघानिक रूप से ओमैक्स इन्फ्रास्ट्रचर/ बिल्डर द्वारा नियमों को ताक पर रख कर जबरिया ग्राम वासियों के विरोध को दरकिनार करते हुए सिंचाई विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से नहर (कल्ली माइनर) को पाटकर डामर की सड़क बना दी गई है जिसका सीधा फायदा ओमैक्स इन्फ्रास्ट्रचर/बिल्डर को पहुंचाया जा रहा है।
        यहां पर यह भी विदित है कि पूर्व में भी ग्राम वासियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसपर अपना विरोध दर्ज कराया था एवं सम्बंधित अधिशाषी अधियंता एवं मुख्य अभियंता को भी सूचित किया गया था कि यह अवैघ कृत्य जन विरोधी है एवं किसानों का सीधे उत्पीड़न करने वाला कदम है परन्तु अधिशाषी अभियंता ने शिकायत सं. 40015719000803 आई.जी.आर.एस. के जवाब में अपनी आख्या प्रस्तुत की कि कल्ली माइनर पर ओमैक्स इन्फ्रास्ट्रचर को नहर की पटरी पर रोड विकसित करने हेतु सिंचाई विभाग के उच्च अधिकारियों के आदेश से अनुमति प्रदान की गई है। यह अधिशाषी अभियंता द्वारा दी गई आख्या भ्रष्टाचार की चरम सीमा है तथा तत्थों को तोड़ मरोड़ कर ओमैक्स इन्फ्रास्ट्रचर/बिल्डर को फायदा पहुंाचने के लिए गलत सूचना उ.प्र. शासन व जन सामान्य को दी जा रही है। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि नहर (कल्ली माइनर) की सिर्फ पटरी पर नहीं बल्कि उसको पूर्ण रूप से पाटकर निजी फायदे के लिए डामर की सड़क बना दी गई है।
         माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा विभिन्न आदेशों में यह स्पष्ट किया गया है कि नहर व तालाब को पाटा नहीं जा सकता है तथा उ.प्र. सरकार के विभिन्न शासनादेशों में उपरोक्त जैसी नहर पाटने के कृत्य को गैर कानूनी बताया गया है। उ.प्र. शासन, सिंचाई अनुभाग-04, संख्या 3005/11-27-सिं-4-75 (डब्लू)/11 लखनऊ दिनांक 21/7/2011 में तत्कालीन प्रमुख सचिव किशन सिंह अटोरिया द्वारा भी इस सम्बंध में आदेशित किया गया था कि नहर को पाटना अवैध है।
          इस सम्बंध में मुख्य मंत्री, प्रमुख सचिव, सिंचाई व प्रमुख सचिव, आवास को 28 जनवरी, 2019 को शिकायत भेजी जा चुकी है। देखना यह है कि भू-माफिया व अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान चलाने वाले मुख्य मंत्री अपने उन अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही करेंगे या नहीं जिन्होंने ओमैक्स के साथ मिलकर 2018 में यह अवैध काम किया है?
 
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