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चिदंबरम को जमानत नहीं
August 23, 2019 • Desk

 

एफआईपीबी की मंजूरी के लिए आईएनएक्स मीडिया ने विदेशी खातों के जरिए किया भुगतान दिसंबर 2016 में ईडी द्वारा सीबीआई को लिखे खत में किए गए कई खुलासे
आईएनएक्स मीडिया मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से जमानत नहीं मिली है. इस मामले में सीबीआई और चिदंबरम की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने चिदंबरम को 26 अगस्त तक सीबीआई की हिरासत में भेज दिया है. इस दौरान सीबीआई चिदंबरम से पूछताछ करेगी और जांच को आगे बढ़ाएगी.

गुरुवार को मामले में सीबीआई की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और चिदंबरम की ओर से एडवोकेट कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी पेश हुए. हालांकि सीबीआई के सबूत के आगे कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी की दलीलें धरी की धरी रह गईं. आखिरकार कोर्ट को चिदंबरम को सीबीआई की हिरासत में भेजना पड़ा. अब सवाल यह है कि आखिर सीबीआई ने कौन से ऐसे सबूत पेश किए, जिनके चलते चिदंबरम को जमानत तक नहीं मिल पाई.

चिदंबरम के खिलाफ सीबीआई के सबूत

आईएनएक्स मीडिया मामले में सीबीआई पी चिदंबरम से फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रोमोशन बोर्ड (FIPB) की मंजूरी और कार्ति चिदंबरम की कंपनी द्वारा ली गई कंसल्टेंसी फीस को लेकर पूछताछ कर रही है. सीबीआई का दावा है कि एडवांस स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेंट लिमिटेड (एएससीपीएल) और अन्य कंपनियों ने आईएनएक्स मीडिया से एफआईपीबी की मंजूरी के लिए पैसा लिया था. एएससीपीएल और अन्य कंपनियां को कार्ति चिदंबरम ने बनाया है.

सीबीआई के मुताबिक कार्ति चिदंबरम और पी चिदंबरम ने आईएनएक्स मीडिया की मदद की. एफआईपीबी की मंजूरी के लिए आईएनएक्स मीडिया ने एएससीपीएल और अन्य कंपनियों को जेनेवा, अमेरिका और सिंगापुर स्थित बैंकों के जरिए भुगतान किया. इस मामले की जांच में बरामद हुए दस्तावेजों और ई-मेल से साफ होता है कि पैसे का भुगतान एफआईपीबी की मंजूरी के लिए दिया गया. उस समय पी चिदंबरम देश के वित्तमंत्री थे. उन्होंने एफआईपीबी की मंजूरी देने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया. सीबीआई का यह भी दावा है कि एएससीपीएल और अन्य कंपनियों ने दिखावे के लिए फेक तरीके से क्रिएटिंग मीडिया कंटेंट, मार्केट रिसर्च के नाम पर कंसल्टेंसी उपलब्ध कराई. हालांकि पी चिदंबरम और आईएनएक्स मीडिया के बीच सीधे संबंध होने के कोई दस्तावेज बरामद नहीं हुए हैं. इसके अलावा दिसंबर 2016 में ईडी ने सीबीआई को इस मामले में एक खत लिखा था, जिसमें कहा गया कि मामले की जांच में खुलासा हुआ है कि एएससीपीएल ने कंसल्टेंसी के नाम पर फंड लिया. इसका मकसद वित्त मंत्रालय से एफआईपीबी की मंजूरी दिलाना था. ईडी ने सीबीआई को लिखे खत में कहा था कि इसको लेकर एएससीपीएल ने कभी  कोई कंसल्टेंसी और टेंडर एडवाइस भी जारी नहीं किया. ईडी ने यह भी बताया कि एएसपीसीएल पर कार्ति चिदंबरम का नियंत्रण है. इस कंपनी को कार्ति के फायदे के लिए ही बनाया गया.

ईडी ने सीबीआई को बताया कि एएससीपीएल के परिसर से बरामद दस्तावजों में खुलासा हुआ कि आईएनएक्स मीडिया ने एएससीपीएल को 15 जुलाई 2008 को चेक के लिए भुगतान किया. आईएनएक्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के एमडी और सीएफओ ने भी एएससीपीएल को भुगतान किए जाने की बात स्वीकार की. उन्होंने यह भी कहा कि एफआईपीबी की मंजूरी के लिए एएससीपीएल को पैसे का भुगतान किया गया था. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस चेक में इंद्राणी मुखर्जी ने दस्तखत किए थे. चिदंबरम 305 करोड़ रुपए के विदेशी निवेश के लिए आईएनएक्स मीडिया को गलत तरह से मंजूरी दिलाने के आरोपी
चिदंबरम के वकील अभिषेक सिंघवी ने स्पेशल कोर्ट में कहा- सीबीआई के हिसाब से जवाब न देना असहयोग नहीं
इस पर सीबीआई ने कहा- हम जबर्दस्ती इकबालिया बयान नहीं ले रहे, लेकिन मामले की जड़ तक जाएंगे
चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल ने कहा- सीबीआई के पास सवाल तक तैयार नहीं, फिर रिमांड क्यों चाहिए? अदालत ने गुरुवार को आईएनएक्स मीडिया मामले में पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम को 26 अगस्त तक सीबीआई की रिमांड पर भेजने का फैसला सुनाया। जस्टिस अजय कुमार कुहार ने कहा कि चिदंबरम के खिलाफ लगे आरोप गंभीर हैं, इनकी गहराई से जांच जरूरी है। सीबीआई के वकील सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि चिदंबरम ने जांच में सहयोग नहीं किया। पूछताछ के लिए उन्हें 5 दिन की सीबीआई रिमांड पर भेजा जाए। इसका विरोध करते हुए चिदंबरम के वकील ने कहा कि सीबीआई के हिसाब से जवाब न देने को असहयोग नहीं कहा जाएगा। कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि जब सीबीआई के पास सवाल तक तैयार नहीं हैं तो फिर रिमांड क्यों चाहिए? जस्टिस अजय कुमार कुहार ने कहा- तथ्यों और हालात के मद्देनजर चिदंबरम को कस्टडी में भेजा जाना न्यायपूर्ण है। रिमांड के दौरान चिदंबरम के वकील और परिजनों को रोजाना 30 मिनट मिलने का समय दिया जाएगा। चिदंबरम को बुधवार रात 10.25 बजे सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया था। रातभर वे सीबीआई के गेस्ट हाउस में ग्राउंड फ्लोर पर सुइट नंबर-5 में रहे।


सीबीआई की दलीलें

तुषार मेहता ने कहा- चुप रहने का अधिकार संवैधानिक है। हमें इससे कोई परेशानी नहीं है। लेकिन, चिदंबरम ने जांच में सहयोग नहीं किया। वह सवालों के जवाब से बचते रहे।
मेहता ने कहा- यह मनी लॉन्ड्रिंग का एक क्लासिक मामला है। हम अभी प्री चार्जशीट स्टेज पर हैं। उनके पास जो जानकारियां हैं, उन्हें देने में उन्होंने सहयोग नहीं किया।
उन्होंने कहा कि सीबीआई के आवेदन पर पूर्व वित्त मंत्री के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था और इसी आधार पर गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।
सीबीआई ने कहा- हम जबर्दस्ती इकबालिया बयान नहीं ले रहे, लेकिन मामले की जड़ तक जाएंगे।
तुषार मेहता ने कहा- आईएनएक्स मीडिया घोटाले की साजिश में चिदंबरम दूसरों के साथ शामिल थे। उनको कस्टडी में लेकर पूछताछ किया जाना जरूरी है ताकि बड़ी साजिश का पर्दाफाश किया जा सके।
उन्होंने कहा- आईएनएक्स मीडिया से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर चिदंबरम से पूछताछ की जाएगी। जांच सही ढंग से हो सके, इसके लिए कुछ निश्चित सवालों के जवाब जानना जरूरी है। बड़े अपराध को अंजाम दिया गया है।
चिदंबरम की तरफ से दलीलें

कपिल सिब्बल ने कहा- इस मामले में आरोपी कार्ति चिदंबरम हैं। जिन्हें मार्च 2018 में दिल्ली हाईकोर्ट ने रेगुलर बेल दी थी। दूसरे आरोपियों को भी जमानत दी गई।
सिब्बल ने दलील दी- चार्ज शीट का ड्राफ्ट तैयार हो गया है, जांच पूरी हो गई है। फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी 6 सचिवों द्वारा दी जाती है। किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया। यह कागजी दस्तावेजों का मामला है। चिदंबरम कभी भी जांच से नहीं भागे।
उन्होंने कहा- पिछली रात सीबीआई ने कहा कि वो चिदंबरम से पूछताछ करना चाहती है। आज दोपहर 12 बजे तक यह पूछताछ शुरू नहीं हुई थी। सीबीआई ने केवल 12 सवाल पूछे। अब तक उन्हें यह मालूम होना चाहिए था कि क्या सवाल पूछने हैं। इन सवालों का चिदंबरम से कोई लेना-देना नहीं।
"यह एक ऐसा मामला है, जिसका सबूतों से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि इसका किसी और चीज से ही ताल्लुक है। अगर कोई जज फैसला देने में सात महीने में लगा दे तो क्या आप इसे चिदंबरम को मिला संरक्षण कहेंगे? हम इससे असंतुष्ट हैं।"
अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा- सीबीआई का पूरा केस इंद्राणी मुखर्जी के बयान और एक केस डायरी पर आधारित है।
सिंघवी ने कहा- अगर जांच एजेंसी मुझे 5 बार फोन करती और मैं नहीं जाता, तब इसे जांच में असहयोग किया जाता। जो जवाब वो सुनना चाहते हैं, उसे नहीं देना असहयोग नहीं है। उन्होंने केवल एक बार चिदंबरम को फोन किया और वे गए। यहां जांच में असहयोग कहां हैं?
सिंघवी ने कहा- कस्टडी में पूछताछ का हम विरोध करते हैं। सीबीआई ने सबूतों से छेड़छाड़ का कोई आरोप नहीं लगाया। चिदंबरम के भागने का खतरा नहीं है। गोलमोल जवाबों के आधार पर सीबीआई रिमांड कैसे मांग सकती है। यह कानून नहीं है।
कोर्ट ने चिदंबरम को अपनी बात रखने का मौका दिया

सुनवाई के दौरान चिदंबरम ने अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन तुषार मेहता ने इसका यह कहकर विरोध कर दिया कि उनकी ओर से पैरवी करने के लिए दो वरिष्ठ वकील कोर्ट में मौजूद हैं। हालांकि, पूर्व वित्त मंत्री को अपनी बात कहने का मौका दिया गया। चिदंबरम ने कहा- आप सवालों और जवाबों को देख लीजिए। कोई भी ऐसा सवाल नहीं है, जिसका मैंने जवाब न दिया हो। उन्होंने पूछा कि क्या मेरे विदेश में खाते हैं, मैंने कहा नहीं। उन्होंने पूछा कि मेरे बेटे का विदेश में खाता है, तो मैंने कहा हां।
सीबीआई को हत्या की आरोपी इंद्राणी पर भरोसा, चिदंबरम पर नहीं- कांग्रेस
सीबीआई और ईडी की कार्रवाई पर पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा सरकार ने इन एजेंसियों को बदले की कार्रवाई करने वाले विभाग में बदल दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई ने इस मामले में इंद्राणी मुखर्जी के बयानों पर भरोसा कर लिया, जिस पर अपनी ही बेटी की हत्या के आरोप हैं, लेकिन चिदंबरम पर नहीं।

कार्ति ने कहा- मैं इंद्राणी मुखर्जी से कभी नहीं मिला

चिदंबरम की पेशी से पहले उनकी पत्नी नलिनी और बेटे कार्ति चिदंबरम भी विशेष अदालत पहुंचे। कार्ति चिदंबरम ने कहा कि उनके पिता के खिलाफ कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि आईएनएक्स मीडिया के प्रमोटर्स पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी से उनकी कभी मुलाकात नहीं हुई। यह केवल मेरे पिता के खिलाफ नहीं, बल्कि कांग्रेस पार्टी के खिलाफ कार्रवाई है। मैं इसके खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करूंगा।

चिदंबरम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था-मेरे खिलाफ कोई आरोप नहीं
बुधवार कोकांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में चिदंबरम ने कहा कि आईएनएक्स मामले में उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं है, सीबीआई और ईडी ने उनके खिलाफ कोई चार्जशीट भी दाखिल नहीं की। इसके बाद चिदंबरम कांग्रेस मुख्यालय से रवाना हो गए। सीबीआई, ईडी और दिल्ली पुलिस की टीम जोरबाग स्थित घर पर पहुंची। सीबीआई की टीम दीवार फांदकर घर में दाखिल हुई और चिदंबरम को हिरासत में लिया।

12 दिग्गज वकील सुप्रीम कोर्ट में दिनभर घूमकर भी नहीं बचा पाए
चिदंबरम की ओर से 12 वकील सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। जस्टिस एनवी रमना से चिदंबरम की गिरफ्तारी पर रोक की मांग की। बेंच ने सुनवाई से इनकार कर दिया। वकील रजिस्ट्रार के पास गए और याचिका चीफ जस्टिस के पास भेजने को कहा। रजिस्ट्री ने याचिका में खामियां बता दीं। दोपहर 2 बजे जस्टिस रमना ने कहा कि लिस्टिंग चीफ जस्टिस करेंगे। लिस्टिंग से पहले सुनवाई नहीं होगी। 3.40 बजे वकील चीफ जस्टिस की कोर्ट पहुंचे। 20 मिनट अयोध्या केस की सुनवाई खत्म होने का इंतजार किया।

सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई शुक्रवार को
सुप्रीम कोर्ट आईएनएक्स मीडिया मामले में पी चिदंबरम की अंतरिम जमानत याचिका पर कल सुनवाई करेगी। जस्टिस आर भानुमति और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ इस पर सुनवाई करेगी। इससे पहले, बुधवार को कोर्ट ने तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया था और शुक्रवार की तारीख तय की थी। दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत याचिका को रद्द होने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया था।

वित्त मंत्री रहते हुए विदेशी निवेश की मंजूरी दी थी
आरोप है कि चिदंबरम ने वित्त मंत्री रहते हुए रिश्वत लेकर आईएनएक्स को 2007 में 305 करोड़ रु. लेने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड से मंजूरी दिलाई थी। जिन कंपनियों काे फायदा हुआ, उन्हें चिदंबरम के सांसद बेटे कार्ति चलाते हैं। सीबीआई ने 15 मई 2017 को केस दर्ज किया था। 2018 में ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। एयरसेल-मैक्सिस डील में भी चिदंबरम आरोपी हैं। इसमें सीबीआई ने 2017 में एफआईआर दर्ज की थी।
वित्त मंत्री पी चिदंबरम को सीबीआई ने बुधवार को देर रात में गिरफ्तार किया था, जहां उन्हें एजेंसी द्वारा पूछे गए 20 सवालों का सामना करना पड़ा, जो आईएनएक्स मीडिया मामले में जुड़े मनी लांडरिंग और भ्रष्टाचार से संबंधित हैं. चिदंबरम ने सीबीआई मुख्यालय में करीब सारी रात जागते हुए गुजारी, क्योंकि उनसे आधी रात के बाद ही पूछताछ की गई. उनसे औपचारिक पूछताछ गुरुवार को रात 12 बजे के बाद शुरू हुई. सीबीआई के निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला खुद शीर्ष एजेंसी के सभी अधिकारियों के साथ वहां मौजूद थे. चिदंबरम ने ज्यादातर सवालों के जवाब अधूरे दिए. उन्होंने कई के जवाब में मालूम नहीं कहा और कई के जवाब ही नहीं दिए.
पूछे गए सवाल -

आपकी विदेशों में संपत्तियों के आय का स्त्रोत क्या है?
यूके, स्पेन और मलेशिया में संपत्तियों को खरीदने के लिए पैसा कहां से आया?
बार्सिलोना टेनिस क्लब को खरीदने का पैसा कहां से आया?
कार्ति को ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड से धन क्यों मिला?
आईएनएक्स सौदे से रिश्वत में मिले धन को आपने या कार्ति ने कहां निवेश किया?
हमारे पास आपके विदेश स्थित शेल कंपनियों के सबूत हैं. आपका क्या कहना है?
आपसे और कार्ति से जुड़ी कितनी शेल कंपनियां हैं?
ये शेल कंपनियां किस सेक्टर की हैं और इनका क्या कारोबार है?
फाइनेंसियल इंटेलीजेंट यूनिट ने मॉरिशस की तीन कंपनियों से आईएनएक्स मीडिया प्रा. लि. में 305 करोड़ रुपये से अधिक के एफडीआई निवेश पर सवाल उठाए हैं, जिसका मालिकाना हक उस समय पीटर मुखर्जी और उसकी पूर्व पत्नी इंद्राणी मुखर्जी के पास था. आपका इस पर क्या कहना है?
क्या आपके बेटे ने एफआईपीबी के विभागों पर प्रभाव डाला?
आपने वित्त मंत्री होने के नाते आईएनएक्स मीडिया सौदे में अपने बेटे को विदेशी निवेश के नियमों की धज्जियां उड़ाने की अनुमति कैसे दी.
आप इंद्राणी मुखर्जी से नार्थ ब्लॉक में क्यों मिले थे?
क्या आपने इंद्राणी को कार्ति के संपर्क में रहने को कहा था?
क्या आप पीटर मुखर्जी से भी मिले थे?
आपकी तरफ से आईएनएक्स मीडिया को मंजूरी देने में नॉर्थ ब्लॉक के और कौन से अधिकारी शामिल थे?
आप नोटिस मिलने के बाद भी क्यों पेश नहीं हुए?
दिल्ली उच्चन्यायालय द्वारा आपकी अग्रिम जमानत की याचिका खारिज करने के बाद से कल शाम तक आप कहां थे और इस दौरान आप किन-किन लोगों से मिले?
इस दौरान आपका मोबाइल फोन बंद था, तो आप कौन सा नंबर इस्तेमाल कर रहे थे?
अगर आपका इरादा गिरफ्तारी से बचने का नहीं था, तो कल (मंगलवार) सुप्रीम कोर्ट से लौटते वक्त आप अपने ड्राइवर और क्लर्क को छोड़कर क्यों निकले?
आप सीबीआई के नोटिस के बावजूद पेश क्यों नहीं हुए?