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काशी का इतिहास Part-1
January 27, 2019 • : ब्यूरो चीफ वाराणसी अमित मिश्रा

 काशी का इतिहास

                                                        
 गंगा तट पर बसी काशी बड़ी पुरानी नगरी है। इतने प्राचीन नगर संसार में बहुत नहीं हैं। हजारों वर्ष पूर्व कुछ नाटे कद के साँवले लोगों ने इस नगर की नींव डाली थी। तभी यहाँ कपड़े और चाँदी का व्यापार शुरू हुआ। कुछ समय उपरांत पश्चिम से आये ऊँचे कद के गोरे लोगों ने उनकी नगरी छीन ली। ये बड़े लड़ाकू थे, उनके घर-द्वार न थे, न ही अचल संपत्ति थी। वे अपने को आर्य यानि श्रेष्ठ व महान कहते थे। आर्यों की अपनी जातियाँ थीं, अपने कुल घराने थे। एक राजघराना काशी में जमा। काशी के पास ही अयोध्या में भी तभी उनका राजकुल बसा। उसे राजा इक्ष्वाकु का कुल कहते थे, यानि सूर्यवंश।[1] काशी में चन्द्र वंश की स्थापना हुई। सैकड़ों वर्ष काशी नगर पर भरत राजकुल के चन्द्रवंशी राजा राज करते रहे। काशी तब आर्यों के पूर्वी नगरों में से थी, पूर्व में उनके राज की सीमा। उससे परे पूर्व का देश अपवित्र माना जाता था।
 आधुनिक काशी राज्य
 आधुनिक काशी राज्य वाराणसी का भूमिहार ब्राह्मण राज्य बना है। भारतीय स्वतंत्रता उपरांत अन्य सभी रजवाड़ों के समान काशी नरेश ने भी अपनी सभी प्रशासनिक शक्तियां छोड़ कर मात्र एक प्रसिद्ध हस्ती की भांति रहा आरंभ किया। वर्तमान स्थिति में ये मात्र एक सम्मान उपाधि रह गयी है। काशी नरेश का रामनगर किला वाराणसी शहर के पूर्व में गंगा नदी के तट पर बना है। काशी नरेश का एक अन्य किला चेत सिंह महल, शिवाला घाट, वाराणसी में स्थित है। यहीं महाराज चेत सिंह जिनकी मा राजपुत थी क्को ब्रिटिश अधिकारी ने २०० से अधिक सैनिकों के संग मार गिराया था। रामनगर किला और इसका संग्रहालय अब बनारस के राजाओं का एक स्मारक बना हुआ है। इसके अलावा १८वीं शताब्दी से ये काशी नरेश का आधिकारिक आवास बना हुआ है।आज भी काशी नरेश को शहर में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। ये शहर के धार्मिक अग्रणी रहे हैं और भगवाण शिव के अवतार माने जाते हैं। ये शहर के धार्मिक संरक्षक भी माने जाते हैं और सभी धामिक कार्यकलापों में अभिन्न भाग होते हैं।[
 काशी नरेशों की सूची:-
 काशी नरेशों की सूची राज्य आरंभ राज्य समाप्त
मनसा राम १७३७ १७४०
बलवंत सिंह १७४० १७७० 

चैत सिंह १७७० १७८०
महीप नारायण सिंह १७८१ १७९४
महाराजा उदित नारायण सिंह १७९४ १८३५
महाराजा श्री ईश्वरी नारायण सिंह बहादुर १८३५ १८८९
लेफ़्टि.कर्नल महाराजा श्री सर प्रभु नारायण सिंह बहादुर १८८९ १९३१
कैप्टन महाराजा श्री सर आदित्य नारायण सिंह १९३१ १९३९
डॉ॰विभूति नारायण सिंह १९३९ १९४७
 डॉ॰विभूति नारायण सिंह भारतीय स्वतंत्रता पूर्व अंतिम नरेश थे। इसके बाद १५ अक्टूबर १९४८ को राज्य भारतीय संघ में मिल गया। २००० में इनकी मृत्यु उपरांत इनके पुत्र अनंत नारायण सिंह ही काशी नरेश हैं और इस परंपरा के वाहक हैं।

                                                                                                                       : ब्यूरो चीफ वाराणसी अमित मिश्रा